बेहतर प्रजातंत्र के लिए प्रशासन पारदर्शी होना चाहिए.

क्यों प्रख्यात / नाम वाले बुद्धिजीवी (EII) इस प्रजा अधीन राजा (राईट टू रिकाल) मांग का विरोध करते हैं?

🚩प्रजा अधीन राजा (राईट टू रिकाल ; भ्रष्ट को नागरिकों द्वारा बदलने का अधिकार) मांग को पूरी करने के लिए सैकड़ों करोड़ों रुपए की आवश्यकता नहीं है, न ही हजारों कर्मचारियों या इमारतों की आवश्यकता है | नागरिकों द्वारा अर्थ लगाये हुए हमारे संविधान के अनुसार मुख्यमंत्री को यह अधिनियम (नियम) लागू करने में विधायकों की मंजूरी की भी जरूरत नहीं है | अभी तक सभी दलों के सांसदों और सभी प्रसिद्द बुद्धिजीवी इस प्रस्तावित सरकारी अधिसूचना के प्रति शत्रुतापूर्ण हैं | सभी दलों के नेताओं को इस प्रस्ताव से नफरत है और उनके मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री ने प्रजा अधीन राजा (राईट टू रिकाल) की मांग पर हस्ताक्षर न करने की कसम खाई है | क्यों? क्योंकि बदलाव की प्रक्रिया तब होती है जब करोड़ों देशवासी बदलाव चाहते हैं और जब प्रत्येक देशवासी को यह विश्वास हो जाता है कि करोड़ों देशवासी उसके साथ हैं तब यह प्रक्रिया रोकी नहीं जा सकती है | मुझे इस वाक्य को दोहराने दिया जाए कि पिछले 3000साल में सभी प्रमुख बदलावों के पीछे यही प्रक्रिया रही है-

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🚩बदलाव की प्रक्रिया तब होती है जब करोड़ों देशवासी सहमत / राजी होते हैं, और करोड़ों देशवासियों को पता होता है कि अन्य करोड़ों देशवासी भी सहमत हुए हैं |

“करोड़ों देशवासी क्या चाहते हैं, वो जानकारी करोड़ों देशवासियों को हो ” यह “राजनीतिक अंकगणित में शून्य ” के सामान है | बुद्धिजीवियों और मीडिया आम देशवासी को हमेशा यह मनाने की कोशिश करती है कि वह बिल्कुल अकेला है और अन्य करोड़ों देशवासी अनजान और सो रहे हैं| प्रजा अधीन राजा (राईट टू रिकाल) न केवल नागरिकों को किसी प्रस्तावित परिवर्तन पर हाँ / नहीं करने में सक्षम बनाता है, बल्कि यदि करोड़ों देशवासी एक बदलाव के लिए सहमत हो गए हैं, तो अन्य करोड़ों देशवासियों को भी पता चलता है कि करोड़ों देशवासी यह परिवर्तन चाहते हैं | यह मीडिया मालिकों को ऐसी अफवाह/गप कि – “लोगों को परवाह नहीं है” बनाने नहीं देता है | प्रजा अधीन राजा (राईट टू रिकाल)मीडिया के मालिकों की करोड़ों देशवासियों की प्राथमिकताओं / जरूरतों को दूसरों को गलत बताने की शक्ति कम करता है |

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🚩  समाधान :- देश में खुद की तकनीक ईजाद करने के लिए आवश्यक कानून पास करवाने होंगे जैसे राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, टीसीपी, शिक्षा में सात्य प्रणाली , भारत में स्वदेशी हथियारों के उत्पादन के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट….आदि । इन कानून के ड्राफ्ट की अधिक जानकारी आप इस लिंक से प्राप्त कर सकते हे ।
https://www.facebook.com/notes/1173396572776102

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१) राईट टू रिकॉल मंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476084522484532

२) भारत में स्वदेशी हथियारों के उत्पादन के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट:  : fb.com/notes/1475760442516940

३) सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिकों के स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) के लिए कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475758839183767

४) ज्यूरी सिस्टम के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475753109184340

५) पारदर्शी शिकायत प्रणाली के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475756632517321

६) हथियारबंद नागरिक समाज की रचना के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475761792516805

नागरिकों को आत्म-सुरक्षा के लिए हरदम तैयार रहना चाहिए, क्योंकि हमारी सरकारों ने हत्यारों, आतंकियों को शरण देने की कसम खा राखी है और सभी सरकारें नागरिकों की सुरक्षा करने के मुद्दे पर फेल हो चुकीं हैं.

७) गोहत्या कम करने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476076805818637

सांसद व विधायक के नंबर एवं संपर्क डिटेल यहाँ से लें http://nocorruption.in/
अपने सांसदों/विधायकों को उपरोक्त क़ानून को गजेट में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से क़ानून लागू करवाने के लिए उन पर जनतांत्रिक दबाव डालिए, इस तरह से उन्हें मोबाइल सन्देश या ट्विटर आदेश भेजकर कि:-
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” माननीय सांसद/विधायक महोदय, मैं आपको अपना एक जनतांत्रिक आदेश देता हूँ कि पारदर्शी शिकायत प्रणाली के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475756632517321
को राष्ट्रीय गजेट में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से इस क़ानून को लागू किया जाए, नहीं तो हम आपको वोट नहीं देंगे.
धन्यवाद,
मतदाता संख्या- xyz ”

इसी तरह से अन्य कानूनी-प्रक्रिया के ड्राफ्ट की डिमांड रखें. यकीन रखे, सरकारों को झुकना ही होगा.
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राईट टू रिकॉल, ज्यूरी प्रणाली, वेल्थ टैक्स जैसेे क़ानून आने चाहिए जिसके लिए, जनता को ही अपना अधिकार उन भ्रष्ट लोगों से छीनना होगा, और उन पर यह दबाव बनाना होगा कि इनके ड्राफ्ट को गजेट में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से क़ानून का रूप दें, अन्यथा आप उन्हें वोट नहीं देंगे.
अन्य कानूनी ड्राफ्ट की जानकारी के लिए देखें fb.com/notes/1479571808802470/
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यदि धर्म और अधर्म के मध्य युद्ध हो तो तीर्थयात्रा का तीर्थस्थान 1 ही बचता है, वो केवल और केवल रणभूमि होती है, न कि कोई हिमालय !!
धर्म की मर्यादा शून्य में नहीं उगती, वो अधर्म के शव के ऊपर उगती है.
पराजय मृत्यु से अधिक महत्त्वपूर्ण है.
औपचारिकताएं सज्जनों के लिए निभानी चाहिए. दुष्टों के लिए नहीं.

इन कानूनों के आने की संभावना तभी बढ़ेगी जब हम सब मिलकर छोटे छोटे लाखों मीडिया स्रोत खड़े करके इन कानूनों की जानकारी करोड़ों नागरिकों तक पहुंचाने के साथ साथ अपने नेताओं पर दबाव बनाएं

जय हिन्द, वन्देमातरम

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