देश को साम्प्रदायिक दंगे से कोई भ्रष्ट जज या वकील नहीं बल्कि जनता ही बचा सकती है.

मित्रों,

1990-1991 में कश्मीर से कश्मीरी पंडितों के पलायन को विदेशी धनपशुओं द्वारा राजनैतिक षड्यंत्र के अंतर्गत अंजाम दिया गया जिससे कश्मीर में उग्रवादियों द्वारा आरोपित आतंकी घटनाओं को अंजाम देकर कश्मीर को देश की मुख्यधारा से अलग करने का अंतिम चरण के एक हिस्से को पूरा किया जाए.

अमेरिका-लन्दन के धनपिशाच १९४७ से ही कभी नहीं चाहते थे कि कश्मीर भारत को मिले, क्योंकि भारत को रूसे के साथ भूमि से सम्बंधित जुड़ाव से सिल्क रूट का मार्ग मिल जाता जिससे अर्थव्यवस्था काफी सुधरती और USSR को भारत में भूमि से रास्ता मिल जाने पर अपना communism फैलाने में आसानी होती.

अतः, भारत के इन सब फायदे वाली बातों को रोकने के लिए CENTO और SEATO treaties (1955-1956) की संधि की गयी थी, जिसके कारण अमेरिका-ब्रिटेन के सेनाओं को छूट मिल गयी थी जिसके चलते पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK-गिलगित-बाल्टिस्तान) में अमेरिका-ब्रिटेन मिलिट्री बेस बना सके और बदले में पाक को हथियार मिलते रहे। इन सभी कारणों से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को आज तक अमेरिका के चंगुल से छुड़ाया जाना तब तक संभव नहीं है, जब तक कि हमारा देश हथियार एवं आयुध निर्माण में पूरी तरह से आत्मनिर्भर न हो. जब तक ये देश आयातित हथियारों के बल पर निर्भर रहता रहेगा, तब तक इसे हर दूसरा देश इसी तरह लूटता रहेगा.

भारत में स्वदेशी हथियारों के उत्पादन के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475760442516940
                                   यदि भारत में हथियारबंद समाज के अंतर्गत लोग रहें, तो लोग आपस में नहीं लड़ेंगे क्योंकि दो गुंडों का समूह शायद ही कभी लड़ता है, क्योंकि वे आपस में जानते हैं कि सबके पास हथियार है तो कोई किसी को उसके घर से निकाल कर भागने पर विवश नहीं करा सकेगा.
हथियारबंद नागरिक समाज की रचना के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475761792516805
                                     मित्रों, यदि पनामा लीक्स वालो से पूछा जाय कि इन लोगो को टैक्स सेफ हेवन की जानकारी किसने दी ? इन्ही वेस्टर्न ठगों धनपशुओं ने दी ! यही लोगो को गलत काम करना सिखाते है और फिर उन्ही को screw भी करते है. हां screw सभी को नहीं, बल्कि कुछ चुने हुए लोगो को किया जाता है है जैसे नवाज़ शरीफ, सद्दाम हुसैन, ओमर गद्दाफी इत्यादि . इसी तरह वह अपनी पुरानी गेम खत्म कर नए खिलाड़ी लाते है.
यह सिर्फ टैक्स हैवन की बात नहीं . यही लोग सद्दाम से बुरे काम करवाते है और फिर उसे खलनायक के रूप में पेश किया जाता है l हिटलर को भी ताकतवर और अपराधी इन्होने बनाया , फिर उसे समाप्त भी इन्होने किया
नार्थ कोरिया को मिसाइल – परमाणु इनकी रजामंदी से ट्रान्सफर हुए और अब उसे एक शैतान के रूप में दर्शाया जा रहा है जंग या राजनीति के लिए .मुझे लगता है चीन के साउथ China sea islands की कहानी भी कुछ ऐसी ही होगी
और यही धन-पिशाच अपने भारतीय कठपुतली सरकारों की evm घोटाले के जरिये J&K में सरकार बनवा देते है फिर इन्ही से पेलेट गन आम आबादी पर इस्तेमाल भी करवाया जाता है , जिसका कोई औचित्य भी नहीं था , और यही लोगो इसे human rights violation भी करार देते है 

 सोशल मीडिया पे इधर राजस्थान में एक मजदूर(नाम अफ्राजुल) की हत्या हुई जिसे बिकाऊ मीडिया जिनमे से अधिकतर मीडिया संस्थानों के मालिक दुनिया में मात्र छः लोग हैं जो दुनिया की सभी मीडिया संस्थाओं को नियंत्रण करते हैं की किस तरह से लोगों को दिग्भ्रमित करने वाला हैडलाइन छापा जाए, ने कुछ इस तरह प्रचारित किया कि हिन्दू द्वारा मुस्लिम की हत्या की गयी.

सही समय पर लोगों को सही न्याय न मिलना उनके हत्यारा बन जाने का एक प्रमुख कारण है.

इसी तरह से २००२ में गुजरात के गोधरा हत्याकांड में दोनों समुदायों के कुछ निरपराधों को अभियुक्त बनाकर दिखाया गया था, जबकि इस हत्या में जिम्मेदार लोग विदेश से नियंत्रित होने वाले लोग हैं जिन्हें ये बताया जाता है कि अमुक अमुक घटना को किस तरह अंजाम दिया जाए और साम्प्रदायिक माहौल बनाया जाए तथा साम्प्रदायिक दंगा को त्वरित गति से फैलाया जा सके .

इसी तरह से पश्चिम बंगाल के दोनों समुदायों के मध्य आराजकता एवं आतंकवाद की स्थिति जबरन बना दी गयी है, दलितों की हितचिन्तक कहलाने वाली वहां की मुख्यमंत्री ने शायद ही किसी दलित के ऊपर हुए अत्याचार के विरुद्ध कोई कदम उठाया हो. उस राज्य में बांग्लादेश से आने वाले अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाना और उन्हें आधार कार्ड, राशन कार्ड सहित वोटर कार्ड दिया जाना, उन नेताओं को ही संदेह की कठघरे में ला खड़ा करता है.

बांग्लादेशियों को अवैध तरीके से भारत में घुसाना वर्ल्ड बैंक के एक योजना का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत सभी भारतीय एवं बंगलादेशी बिना वीसा के सीमा के पार आ जा सकेंगे. और इसी कारण से भारत में हिन्दुओं से जुड़े कोई भी मुद्दे साम्प्रदायिक घोषित हो रहे हैं, जिससे मूसल्वानो को सहूलियत हो, वैसे ही हिन्दुओं का अपना धार्मिक प्रतीक इत्यादि नष्ट भ्रष्ट किया जा सके.
और यही कारण है कि आधार कार्ड में केवल आपका पता दर्ज रहता है और आपका बायोमेट्रिक डाटा, लेकिन आधार कार्ड में आपकी राष्ट्रीयता दर्ज नहीं रहती है..
आधार कार्ड के समर्थक क्या ये बता सकते हैं कि इसमें राष्ट्रीयता दर्ज न होना, एकल वैश्विक सरकार का निर्माणाधीन देश का स्थिति और आपकी नागरिकता नहीं दर्शाएगी? http://bit.ly/2kNRtRk

ये सब अंतर्राष्ट्रीय दबाव के द्वारा हमारी सरकारों द्वारा करवाया जा रहा है. और जो इन लोगों की योजनाओं के अनुसार नहीं चलता है, उनकी सर्कार गिरा दी जाती है. EVM इसी कड़ी में एक सहायक का काम करता है और वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं को हमारे देश जैसी तीसरी दुनिया के देशों के अन्दर अराजक माहौल बनाकर लोगों को जबरन अपराधी बनवाना और पिछले दरवाजे से सभी बौद्धिक एवं प्राकृतिक संसाधनों को अपने यहाँ ट्रान्सफर करवाना वर्ल्ड बैंक की चाल है, जिसे कई योजनाओं में तोड़ कर यूनाइटेड नेशन द्वारा यहाँ आदमी एवं एन जी ओ भेजकर अंजाम दिया जाता है, वो संस्थान अपने उन आदमियों को नोबेल प्राइज भी दिलवा देती है जिससे साधारण सामान्य लोग उनके द्वारा कहे जा चुके बातों को सीधे हाथ ले लें.

For more information- http://bit.ly/2nZWOt9  http://bit.ly/2yYAXmD

http://bit.ly/2nX1VqG

 इसी तरह से १६ दिसम्बर २०१२ के डेल्ही की निर्भया बलात्कार के मुख्य आरोपी को मानसिक व्य्वस्कता के आधार पर उपयुक्त सजा न देकर उसे सुधर घर भेजा गया और वहां से छूटने पर उसे समाज में स्थान दिलवाने के लिए कुछ रुपये से सरकार ने ही सहायता की. इससे यही निष्कर्ष निकलता है कि सरकारें स्वयं समाज का अपराधीकरण कर संरक्षण देतीं हैं. यदि इन मामलों में समाज स्वयं न्याय करे तो क्या समाज में अपराध व अपराधी का स्थान रहेगा?

कई मामलों में तो घर के ही रिश्तेदार इत्यादि लड़की का रेप करते हैं और पीड़ित को सामाजिक आदर इज्जत के नाम पे चुप रहने को बोला जाता है, क्यों? क्योंकि समाज के लोग न्याय नहीं करते हैं, बल्कि वे कोर्ट पर निर्भर हैं और पीड़ित की आर्थिक स्थिति मजबूत बहुत ही कम मामलों में होती है.

इसी तरह समाज को स्वयं आकलन करना चाहिए कि वो स्वयं न्याय न कर भ्रष्ट जजों, वकीलों एवं कोर्ट व्यवस्था पर क्यों निर्भर है?

उन्हें जनता द्वारा जनता को न्याय के लिए ज्यूरी प्रणाली द्वारा न्याय किये जाने को लेकर ज्यूरी सिस्टम लाने के लिए सरकार के ऊपर दबाव डालना चाहिए, जिससे लोग अपना न्याय स्वयं कर सकें.

साथ ही, देश में पीड़ितों की शिकायत अधिकतर मामलों में पुलिस द्वारा लिखी नहीं जाती और उन्हें अन्य पुलिस थानों के भी एवं अन्य अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने के बाद भी कई बार शिकायत दर्ज नहीं की जाती.

इससे बचने के लिए पुलिस अधिकारी के ऊपर राईट-टू-रिकॉल का क़ानून लागू होना चाहिए.

राईट टू रिकॉल जिला पुलिस प्रमुख के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/476540585772259

 देश में भ्रष्ट जज और भ्रष्ट कोर्ट व्यवस्था में न्याय आज जाति एवं धन आधारित दिया जा रहा है, आप देख सकते हैं कि ऊपर दिए गए मामलों में सजा पीड़ित को ही हुई है, ख़ास समुदाय एवं धन वालों को नहीं हुई है, असली जिम्मेदार जो आज असली नेता बनके घूमते हैं, क्या वे इतने गैर-जिम्मेदार हैं कि सत्ता पाने के लिए न्य-व्यवस्था का ध्रुवीकरण कर हिन्दुस्तानी समाज में समुदाय व धन आधारित न्याय निर्धारित की जाती है?

न्यायालयों में ग्रीस की देवी को अंधी दिखलाया जाना अंग्रेजों की चाल हो सकती है, जिनके लिए न्याय व्यवस्था भारतीयों के लिए थी ही नहीं, आज भी हमारी न्याय व्यवस्था लगभग उन्ही अंग्रेजों के द्वारा बनाये जा चुके कानूनों पर ही चल रही है और ग्रीस की न्यायिक देवी आज भी अंधी है.

राईट टू रिकॉल मंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476084522484532

राइट टू रिकॉल महापौर का प्रस्तावित कानून-ड्रॉफ्ट : fb.com/notes/1476082465818071

राइट-टू-रिकॉल विधायक के लिए प्रस्तावित कानून ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476073165819001

राईट टू रिकॉल सांसद के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475749302518054

एक अन्य बात जो ध्यान देने वाली है वो ये है कि न्याय मिलने में इतनी देरी लगती है कि भ्रष्ट न्याय व्यवस्था ही मानव-हत्यारा बनने को लोगों को मजबूर कर रही है. ये भ्रष्ट सरकारी एवं न्यायिक प्रशासनिक सेवा ही हमें लोगों का हत्यारा बनने पर मजबूर करने वाली है, जिसके चलते अमेरिका भारत-सरकार को साबित कर सके, कि तुम शासन चलाने के योग्य नहीं हो, अतः, संसद हमारे हवाले करो.

अमेरिका एवं सऊदी अरब द्वारा यहाँ नेताओं के साथ साथ उन विदेशियों तथा धन्माफियाओं की फंडिंग इस तरह से की जाती है कि ये देश आतंकवाद की आग में जल पाक कर २०४७ तक एक और पाकिस्तान का निर्माण कर सके.

                                    अमेरिका जो ऊँची सोच का दम्भ रखता है शायद उसे भारत की न्याय परंपरा से अधिक संकीर्ण सोच से ग्रसित और गलत ताकतों द्वारा पोषित मेनस्ट्रीम मीडिया के कुछ प्रकाशनों पे ज्यादा ही भरोसा है. 

अतः, भ्रष्ट मीडिया को नियंत्रण में रखने के लिए दूरदर्शन चैरमैन के ऊपर राईट-टू-रिकॉल का कानून लागू करवाना चाहिए, जिससे दूरदर्शन सच समाचार दिखलाने को बाध्य हो, यदि जनता सच जानने के लिए दूरदर्शन ही देखेगी तो अन्य चैनल का मूल्य अपने आप ही कम हो जाएगा. राईट टू रिकॉल दूरदर्शन अध्यक्ष के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475755192517465

इसी तरह से न्यायिक प्रणाली में ज्यूरी प्रणाली लायी जानी चाहिए, जिससे जनता अपने साथ होने वाले अन्याय के लिए न्याय स्वयं कर सके न कि बीके हुए कोर्ट एवं वकील , साथ ही अभियुक्त एवं आरोपी से सच उगलवाने के लिए नार्को टेस्ट के कड़े क़ानून का प्रावधान होना ही चाहिए जिससे, लोग सच उगलना सीख सकें.

ज्यूरी प्रणाली  के लिए ड्राफ्ट यहाँ देखें- fb.com/notes/1475753109184340

पब्लिक में नार्को टेस्ट – बलात्कार , हत्या , भ्रष्टाचार , गौ हत्या आदि के लिए नारको टेस्ट का कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476079982484986

सबूतों को पारदर्शी माध्यम से सार्वजनिक होने हेतु पारदर्शी शिकायत प्रणाली होना अत्यावश्यक है, जिसमे कि लोग निडर होकर सबूत इत्यादि सार्वजनिक कर प्रधानमन्त्री की वेबसाइट पर रख सकें जिसे अन्य सभी नागरिक बिना लॉग इन के देख सकें. पारदर्शी शिकायत प्रणाली के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475756632517321

देश में जनसँख्या नियंत्रण के लिए “टू चाइल्ड पॉलिसी” के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1478457208913930

 सांसद व विधायक के नंबर यहाँ से देखें nocorruption.in/

🚩 अपने सांसदों/विधायकों को उपरोक्त क़ानून को गजेट में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से क़ानून लागू करवाने के लिए उन पर जनतांत्रिक दबाव डालिए, इस तरह से उन्हें मोबाइल सन्देश या ट्विटर आदेश भेजकर कि:-
.

” माननीय सांसद/विधायक महोदय, मैं आपको अपना एक जनतांत्रिक आदेश देता हूँ कि‘पारदर्शी शिकायत प्रणाली के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475756632517321

को राष्ट्रीय गजेट में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से इस क़ानून को लागू किया जाए, नहीं तो हम आपको वोट नहीं देंगे.
धन्यवाद,
मतदाता संख्या- xyz ”
इसी तरह अन्य ड्राफ्ट के लिए भी आदेश भेज सकते हैं .
आप ये आदेश ट्विटर से भी भेज सकते हैं. twitter.com पर अपना अकाउंट बनाएं और प्रधामंत्री को ट्वीट करें अर्थात ओपन सन्देश भेजें.

ट्वीट करने का तरीका: होम में जाकर तीन टैब दिखेगा, उसमे एक खाली बॉक्स दिखेगा जिसमे लिखा होगा कि “whats happening” जैसा की फेसबुक में लॉग इन करने पर पुछा जाता है कि आपके मन में क्या चल रहा है- तो अपने ट्विटर अकाउंट के उस खाली बॉक्स में लिखें  ” @PMO India I order you to print draft पारदर्शी शिकायत प्रणाली के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475756632517321  in gazette notification asap” . इसी तरह अन्य ड्राफ्ट के लिए भी आदेश भेज सकते हैं .

बस इतना लिखने से पी एम् को पता चल जाएगा, सब लोग इस प्रकार ट्विटर पर पी एम् को आदेश करें.

याद रखिये कि इस तरह की सभी मांगों के लिए सौ-पांच सौ की संख्या में एकत्रित होकर ही आदेश भेजिए, इसी तरह से अन्य कानूनी-प्रक्रिया के ड्राफ्ट की डिमांड रखें. यकीन रखे, सरकारों को झुकना ही होगा.

🚩राईट टू रिकॉल, ज्यूरी प्रणाली, वेल्थ टैक्स जैसेे क़ानून आने चाहिए जिसके लिए, जनता को ही अपना अधिकार उन भ्रष्ट लोगों से छीनना होगा, और उन पर यह दबाव बनाना होगा कि इनके ड्राफ्ट को गजेट में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से क़ानून का रूप दें, अन्यथा आप उन्हें वोट नहीं देंगे.
अन्य कानूनी ड्राफ्ट की जानकारी के लिए देखें fb.com/notes/1479571808802470

धर्म की परिभाषा : दूसरों के अधिकारों एवं अपने कर्तव्यों के मध्य संतुलन बनाना धर्म है .

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जय हिन्द, वन्दे मातरम् ||

 

 

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