पद्मावती बैन, जज-हत्या, न्यायिक भ्रष्टाचार और लोकतान्त्रिक समाधान

मित्रों, सन-1947 से लेकर 2014 तक जनता न्यायालयों में जजों से न्याय मांगते थे, लेकिन जून-2014 के बाद हालात कुछ ऐसे हो गए कि जज ही सार्वजनिक प्रेस-वार्ता द्वारा जनता से न्याय की गुहार लगा रहे हैं. क्या इसके पहले लोकतंत्र कभी खतरे में नहीं आया था? जबकि सर्वोच्च न्यायलय द्वारा लिए गए सभी निर्णयों की समीक्षा का अधिकार आज भी ब्रिटेन के पास सुरक्षित है. लोकतंत्र के अपहरण का आज ही समस्या क्यों सार्वजनिक हुआ? क्या अरुणाचल-प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कलिको-पुल की सुसाइड नोट में दर्ज नोट में उल्लिखित घटनाएं इस देश में लोकतंत्र की हत्या की और इशारा नहीं है?  [ https://thewire.in/106719/kalikho-pul-note-full-text/ ]

खैर…..

अंदाजा लगाइये कि, पद्मावती फिल्म पर रोक लगाने के फैसले को किस जज ने रद्द किया होगा ? संकेत – इन्ही राष्ट्रवादी ( !!) जज ने जल्लिकट्ट को बेन किया था, और मुंबई में डांस बार फिर से खुलवाने के आदेश भी इन्ही ने दिए थे !!!
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पद्मावती फिल्म को रिलीज करने का आदेश देने वाले इस राष्ट्रवादी जज का नाम है — दीपक मिश्रा !!! वही दीपक मिश्रा जिसके नाम का लॉकेट आजकल संघ के कार्यकर्ता अपने गले में लटकाये घूम रहे है !!
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 मुख्यमंत्री यदि चाहे तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए पद्मावती फिल्म पर बेन जारी रख सकते है। सुप्रीम कोर्ट जज के पास तब सिर्फ एक विकल्प बचता है – वह केंद्र सरकार को यह आदेश दे सकता है कि राज्य सरकार को बर्खास्त किया जाये। पर यदि प्रधानमंत्री राज्य सरकार को बर्खास्त करने से इंकार कर देते है तो सुप्रीम कोर्ट जज के पास अपने चेंबर में जाकर खामोश बैठ जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। भारत के सुप्रीम कोर्ट के पास केंद्र सरकार को बर्खास्त करने का कोई अधिकार नहीं है। लेकिन प्रधानमंत्री चाहे तो सुप्रीम कोर्ट जज को नौकरी से निकाल सकते है।
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तो अब हमारे मुख्यमंत्रियों एवं प्रधानमंत्री को यह तय करना पड़ेगा कि वे सुप्रीम कोर्ट जज की आज्ञा का पालन करते है या उसे चुप करके बैठ जाने को कहते है।
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असल में अब मालूम होगा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्रीयो में से किसके सीने का नाप 56″ है।
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 भारत के लोग पीएम एवं सीएम को चुनते है सुप्रीम कोर्ट जज को नहीं। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट जज ने भारत के पीएम एवं सीएम को जमा कर दिया है तब भारत के मतदाताओं को यह तय करना चाहिए कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश को नौकरी से निकालने का अधिकार चाहिए या नहीं ?
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दीपक मिश्रा ने पद्मावती फिल्म पर बेन को खारिज करते हुए इसे रिलीज करने के आदेश दिए है। और अब हम मेरुदण्ड विहीन मुख्यमंत्रियों एवं प्रधानमंत्री को इस आदमी के आदेश का पालन करते देखेंगे !!

 मित्रों, इसी प्रकार से कुछ महीने से एक जज लोया की मौत के बारे में मिडिया में काफी कुछ कहा सुना गया, कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि

  •  जज लोया की बहन बियाणी दांडे अपने भाई की मौत के बारे में बताती हैं कि ”लोया की पत्‍नी शर्मिला और उनकी बेटी अपूर्वा व बेटा अनुज मुंबई से गाटेगांव एकाध जजों के साथ आए। उनमें से एक ”लगातार अनुज और दूसरों से कह रहा था कि किसी से कुछ नहीं बोलना है ”अनुज दुखी था और डरा हुआ भी था, लेकिन उसने अपना हौसला बनाए रखा और अपनी मां के साथ बना रहा।”
  • आप प्रेस कॉन्फ्रेंस देख लीजिए शब्दश यही कल की स्थिति भी थी पड़ोस में बैठे पारिवारिक मित्र जज साहब तो साफ बोल पड़े कि हम किसी अमित सर के पास गए और उन्होंने ये प्रेस कॉन्फ्रेंस अरेंज की है, जज लोया की मौत पर बेटे ने जो कुछ भी दबाव में कहा है उसके बावजूद भी कुछ सवाल अभी भी अनुत्तरित ही हैं
  •  (1) जस्टिस लोया की मौत कब हुई, इस पर अफसर से लेकर डॉक्टर तक खामोश क्यों हैं। तमाम छानबीन के बाद भी अब तक मौत की टाइमिंग का खुलासा क्यों नहीं हुआ
  • (2)48 वर्षीय जस्टिस लोया की हार्ट अटैक से जुड़ी कोई से मेडिकल हिस्ट्री नहीं थी, फिर मौत का हार्टअटैक से कनेक्शन कैसे
  • (3)उन्हें वीआइपी गेस्ट हाउस से सुबह के वक्त आटोरिक्शा से अस्पताल क्यों ले जाया गया जबकि वो सरकारी गेस्ट हाउस है वहाँ कई गाड़िया रहती है, रवि भवन में 30 नवंबर और 1 दिसंबर को ठहरे बाकी वीआइपी कौन थे?
  • (4)हार्टअटैक होने पर परिवार को तत्काल क्यों नहीं सूचना दी गई। हार्टअटैक से नेचुरल डेथ के इस मामले में अगर पोस्टमार्टम जरूरी था तो फिर परिवार से क्यों नहीं पूछा गया, दांडे अस्‍पताल में उन्‍हें कौन सी दवा दी गई
  • ( 5)पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के हर पेज पर एक रहस्मय दस्तख्वत हैं, ये दस्तख्वत जस्टिस लोया के कथित रिश्तेदार के बताए जाते हैं। जिन्हें जस्टिस का ममेरा भाई बताया गया है। परिवार का कहना है-इस नाम का जस्टिस का कोई ममेरा भाई नहीं है
  • (6)अगर इस रहस्यमय मौत के पीछे कोई साजिश नहीं थी तो फिर मोबाइल के सारे डेटा मिटाकर उनके परिवार को ‘डिलीटेड डेटा’ वाला फोन क्यों दिया गया
  • (7) बियाणी की डायरी में दर्ज एक टिप्‍पणी कहती है, ”उनके कॉलर पर खून था। उनकी बेल्‍ट उलटी दिशा में मोड़ी हुई थी। पैंट की क्लिप टूटी हुई थी। मेरे अंकल को भी महसूस हुआ था कि कुछ संदिग्‍ध है।” हरकिशन ने मुझे बताया, ”उसके कपड़ों पर खून के दाग थे।” मांधाने ने बताया कि उन्‍होंने भी ”गरदन पर खून” देखा था। उन्‍होंने बताया कि ”उनके सिर पर चोट थी और खून था… पीछे की तरफ” और ”उनकी शर्ट पर खून के धब्‍बे थे।” हरकिशन ने बताया, ”उसकी शर्ट पर बाएं कंधे से लेकर कमर तक खून था।”

खून का जिक्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्यो नही है? ऐसा बहुत कुछ हैं इस केस में जो अब तक अनसुलझा है, ओर इसीलिए निष्पक्ष जांच और फैसला होना चाहिए
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 समाधान:   

हमारे द्वारा प्रस्तावित समाधान — भारत के कार्यकर्ता राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज के क़ानून की मांग करे ताकि नागरिक जब चाहे तब सुप्रीम कोर्ट जज को नौकरी से निकाल सके।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश पर राईट टू रिकॉल प्रक्रिया ( SCCJ ) fb.com/notes/1560897550669895 

हत्या, बलात्कार जैसे मामलों में अभ्युक्त एवं मामलों से जुड़े सभी लोगों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट ( fb.com/notes/1476072475819070    )       लिया जाना चाहिए.

सांसद व विधायक के नंबर यहाँ से देखें nocorruption.in/

🚩 अपने सांसदों/विधायकों को उपरोक्त क़ानून को गजेट में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से क़ानून लागू करवाने के लिए उन पर जनतांत्रिक दबाव डालिए, इस तरह से उन्हें मोबाइल सन्देश या ट्विटर आदेश भेजकर कि:-
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” माननीय सांसद/विधायक महोदय, मैं आपको अपना एक जनतांत्रिक आदेश देता हूँ कि‘ “उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश पर राईट टू रिकॉल प्रक्रिया ( SCCJ ) fb.com/notes/1560897550669895

को राष्ट्रीय गजेट में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से इस क़ानून को लागू किया जाए, नहीं तो हम आपको वोट नहीं देंगे.
धन्यवाद,
मतदाता संख्या- xyz ”
इसी तरह अन्य ड्राफ्ट के लिए भी आदेश भेज सकते हैं .
आप ये आदेश ट्विटर से भी भेज सकते हैं. twitter.com पर अपना अकाउंट बनाएं और प्रधामंत्री को ट्वीट करें अर्थात ओपन सन्देश भेजें.

ट्वीट करने का तरीका: होम में जाकर तीन टैब दिखेगा, उसमे एक खाली बॉक्स दिखेगा जिसमे लिखा होगा कि “whats happening” जैसा की फेसबुक में लॉग इन करने पर पुछा जाता है कि आपके मन में क्या चल रहा है- तो अपने ट्विटर अकाउंट के उस खाली बॉक्स में लिखें  ” @PMO India I order you to print draft “RTR-SCCJ : fb.com/notes/1560897550669895 in gazette notification asap” . इसी तरह अन्य ड्राफ्ट के लिए भी आदेश भेज सकते हैं . बस इतना लिखने से पी एम् को पता चल जाएगा, सब लोग इस प्रकार ट्विटर पर पी एम् को आदेश करें.

याद रखें कि इस तरह की सभी मांगों के लिए सौ-पांच सौ की संख्या में एकत्रित होकर ही आदेश भेजिए, इसी तरह से अन्य कानूनी-प्रक्रिया के ड्राफ्ट की डिमांड रखें. यकीन रखे, सरकारों को झुकना ही होगा.

 नागरिको को नेताओं का पूजन करने की जगह राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स आदि क़ानून लागू करवाने के लिए प्रयास करने चाहिए। इन कानूनों के आने से भारत की स्थानीय इकाइयों की निर्माण क्षमता बढ़ेगी और अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का प्रभाव कम होने लगेगा। अन्यथा, सोनिया-मोदी-केजरीवाल के भरोसे रहने से भारत पर अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का पूर्ण नियंत्रण लगभग नहीं बल्कि पूरी तरह से तय है।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश पर राईट टू रिकॉल प्रक्रिया ( SCCJ ) fb.com/notes/1560897550669895
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राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम एवं वेल्थ टेक्स के प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें https://www.facebook.com/notes/1479571808802470
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  • ज्यूरी सिस्टम के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475753109184340
  • राईट टू रिकॉल सांसद के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475749302518054
  • उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश पर राईट टू रिकॉल प्रक्रिया ( SCCJ ) fb.com/notes/1560897550669895
  • उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश के लिए राईट टू रिकॉल प्रक्रिया ( HcCj ) fb.com/notes/1560901320669518
  • पारदर्शी शिकायत प्रणाली के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475756632517321
  • राईट टू रिकॉल मुख्यमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476067969152854
  • पब्लिक में नार्को टेस्ट – बलात्कार , हत्या , भ्रष्टाचार , गौ हत्या आदि के लिए नारको टेस्ट का कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476072475819070
  • राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476078685818449
  • राईट टू रिकॉल मंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476084522484532
  • संपत्ति कर के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476541592438825

 

 राईट टू रिकॉल, ज्यूरी प्रणाली, वेल्थ टैक्स जैसेे क़ानून आने चाहिए जिसके लिए, जनता को ही अपना अधिकार उन भ्रष्ट लोगों से छीनना होगा, और उन पर यह दबाव बनाना होगा कि इनके ड्राफ्ट को गजेट में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से क़ानून का रूप दें, अन्यथा आप उन्हें वोट नहीं देंगे.

अन्य कानूनी ड्राफ्ट की जानकारी के लिए देखें fb.com/notes/1479571808802470

Note: कार्यकर्ता अपने हर स्तर के अफसरों को कहें कि साईट बनाएँ जिसमें नाम डालकर उनके द्वारा समर्थित या विरोध हुआ बिल का पता चले और बिल का पीडीऍफ़ भी

Image-Courtesy- https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/photo-feature/padmavati-incidents-that-made-headlines-about-the-deepika-padukone-ranveer-singh-shahid-kapoor-film/spiritual-leader-sri-sri-ravi-shankar-finds-nothing-objectionable-in-padmaavat/photostory/62550480.cms

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जय हिन्द, जय भारत, वन्दे मातरम् ||

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