देश में न्यायिक प्रक्रिया में ज्यूरी प्रणाली से औद्योगिक क्रांति लायी जा सकती है? कैसे !

दिल्ली में सीलिंग का षडयंत्र भाजपा कर रही नौटंकी.

अस्मिता की राजनीति पूंजीवादी निरंकुशता का अभिन्न अंग है. आमूल परिवर्तनवादी दृष्टि और कार्यपद्धति के लिए पूंजीवादी संस्थाओं को नष्ट करने की प्रतिबद्धता चाहिए। “खुद बागान स्वामी बनने की डाह जनित फंतासी पालते गुलाम अपनी शारीरिक व मानसिक जंजीरों को कभी नहीं तोड़ सकते”- यह मनोवृत्ति गुलामी की मानसिकता है। इस प्रकार, पूंजीवादी सत्ता की वर्गीय प्रकृति से अपने इनकार के कारण, अस्मिता की राजनीति के रोष भरे समूह एक गुलाम मानसिकता प्रदर्शित करते हैं, खुद पर ही जुल्म में सहअपराधी बन जाते हैं।

 दिल्ली में स्थानीय बाजार बंद किये जा रहें स्थानीय नागरिक भी ये बाजार बचाना चाहते हैं ये बाजार आवश्यक होते हैं। भाजपा भी इसे रोकना चाहती है। फिर ये कौन करवा रहा है ?
असल में भाजपा ही चरणबद्द तरीके से ये व्यापार तोड़ रही है:-
1- पहले नोटबंदी करके देश के छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ी देश को कोई लाभ नहीं हुआ।
2- GST लागू की ताकि छोटे व्यापारियों को उजाड़ा जा सके।
3- किरयाणा में 100% FDI लागू की गयी।
4- अब दुकानों पर जबरदस्ती ताला लगवाया जा रहा है।
विदेशी कंपनियों को धड़ाधड़ मोदी जी बुला रहे हैं लेकिन स्थानीय व्यापारी के कारण उन तक उपभोक्ता नहीं पहुँच पा रहा ना ही स्थानीय नागरिक वहाँ जाना चाहता। इसलिए मोदी साहेब ने स्थानीय व्यापारियों की दुकानों ताला लगाकर अपने विदेशी व देशी बड़े उधोगपति के पास ग्राहक भेजने का इंतजाम कर दिया।

 समाधान 
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न्यायिक प्रक्रिया में ज्यूरी प्रणाली का समावेश हो जिसमे कानून की विवेचना का अधिकार जनता के पास रहे, न कि भ्रष्ट जजों एवं भ्रष्ट वकीलों के पास. ड्राफ्ट-  fb.com/notes/1475753109184340
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जमीनों के दाम कर देने वाले वेल्थ टैक्स का ड्राफ्ट जिसके लागू हो जाने से देश में सभी लोग उद्योगों के लिए जमीन खरीद सकेंगे, क्योंकि उद्योग लगाने में भूमि की कीमत बहुत मायने रखती है, लेकिन SEZ के अंतर्गत सभी विदेशी कंपनियों को कौड़ियों के भाव में जमीन दे दी जाती है, वहीँ देश के व्यापारी इसके लिए तडपते रह जाते हैं, लेकिन उन्हें अपने उद्योगों के लिए भूमि नसीब नहीं हो सकती, इसके लागू हो जाने से लोग गो-पालन एवं पशु पालन का काम भी बड़े पैमाने पर कर सकेंगे जिससे गौ-रक्षा में वृद्धि भी होगी और कुछ हद तक् बेरोजगारी भी दूर हो सकेगी जिसका मजाक हाल में हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने संसद में बनाया था. हम लोग पहले से ही बेरोजगारी की हालत में पकौड़े ही बनाते आ रहे हैं जबकि देश में न्यूनतम बेरोजगारी दस हजार रुपये प्रति माह तय की गयी थी, देश में रोजगारी देने के लिए भू-कीमत कम होने के साथ गो-पालन से बेरोजगारी में कुछ हद तक कमी हो सकेगी. इसे वेल्थ टैक्स या संपत्ति कर बोलते हैं. ड्राफ्ट यहाँ देखें- संपत्ति कर के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476541592438825  –

ज्यूरी  प्रणाली में बारे में इस लेख में अंतिम भाग में पढ़ें.

भ्रष्ट नेता, मंत्री, सांसदों, विधायकों, जजों को हटाने के लिए राईट टू रिकॉल; राईट टू रिकॉल सांसद के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475749302518054

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश पर राईट टू रिकॉल प्रक्रिया ( SCCJ ) fb.com/notes/1560897550669895

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश के लिए राईट टू रिकॉल प्रक्रिया ( HcCj ) fb.com/notes/1560901320669518

राइट-टू-रिकॉल जिला प्रधान जज के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1475755772517407

राईट टू रिकॉल मुख्यमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476067969152854

राइट-टू-रिकॉल विधायक के लिए प्रस्तावित कानून ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476073165819001

राईट टू रिकॉल मंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476084522484532

सांसद व विधायक के नंबर यहाँ से देखें nocorruption.in/

🚩 अपने सांसदों/विधायकों को उपरोक्त क़ानून को गजेट में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से क़ानून लागू करवाने के लिए उन पर जनतांत्रिक दबाव डालिए, इस तरह से उन्हें मोबाइल सन्देश या ट्विटर आदेश भेजकर कि:-
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” माननीय सांसद/विधायक महोदय, मैं आपको अपना एक जनतांत्रिक आदेश देता हूँ कि‘ “

ज्यूरी प्रणाली के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट : fb.com/notes/1476076805818637 

को राष्ट्रीय गजेट में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से इस क़ानून को लागू किया जाए, नहीं तो हम आपको वोट नहीं देंगे.
धन्यवाद,
मतदाता संख्या- xyz ”
इसी तरह अन्य ड्राफ्ट के लिए भी आदेश भेज सकते हैं .
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आप ये आदेश ट्विटर से भी भेज सकते हैं. twitter.com पर अपना अकाउंट बनाएं और प्रधामंत्री को ट्वीट करें अर्थात ओपन सन्देश भेजें.

ट्वीट करने का तरीका: होम में जाकर तीन टैब दिखेगा, उसमे एक खाली बॉक्स दिखेगा जिसमे लिखा होगा कि “whats happening” जैसा की फेसबुक में लॉग इन करने पर पुछा जाता है कि आपके मन में क्या चल रहा है- तो अपने ट्विटर अकाउंट के उस खाली बॉक्स में लिखें  ” @PMO India I order you to print draft “#JurySystemInIndia fb.com/notes/1476076805818637   in gazette notification asap” . इसी तरह अन्य ड्राफ्ट के लिए भी आदेश भेज सकते हैं .

बस इतना लिखने से पी एम् को पता चल जाएगा, सब लोग इस प्रकार ट्विटर पर पी एम् को आदेश करें.

याद रखिये कि इस तरह की सभी मांगों के लिए सौ-पांच सौ की संख्या में एकत्रित होकर ही आदेश भेजिए, इसी तरह से अन्य कानूनी-प्रक्रिया के ड्राफ्ट की डिमांड रखें. यकीन रखे, सरकारों को झुकना ही होगा.

🚩राईट टू रिकॉल, ज्यूरी प्रणाली, वेल्थ टैक्स जैसेे क़ानून आने चाहिए जिसके लिए, जनता को ही अपना अधिकार उन भ्रष्ट लोगों से छीनना होगा, और उन पर यह दबाव बनाना होगा कि इनके ड्राफ्ट को गजेट में प्रकाशित कर तत्काल प्रभाव से क़ानून का रूप दें, अन्यथा आप उन्हें वोट नहीं देंगे.
अन्य कानूनी ड्राफ्ट की जानकारी के लिए देखें fb.com/notes/1479571808802470

रिफरेन्स http://indianexpress.com/article/cities/delhi/sc-orders-security-for-monitoring-body-involved-in-delhi-sealing-drive-5057360/

https://thewire.in/219812/amid-delhi-sealing-drive-focus-stays-relief-traders-not-curbing-unauthorised-construction/

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ज्यूरी प्रणाली : – 

ये एक ऐसी व्यवस्था है, जिसका समावेश देश की न्यायिक प्रक्रिया में होने से असली लोकतंत्र आ सकता है. राजशाही एवं तानाशाही खत्म हो सकती है. यह कानूनी ड्राफ्ट एक ऐसे सिस्टम की स्थापना करता है जहाँ जिला अदालतों में जूरी द्वारा दिए गए निर्णय के विरुद्ध याचिका दर्ज होने पर सुनवाई और निर्णय उच्च न्यायलय और उच्चतम न्यायलय की जूरी द्वारा होगी। इस जूरी मंडल का चयन किसी राज्य अथवा भारत की मतदाता सूचियों में से क्रम रहित ( रेंडमली ) तरीके से किया जाएगा। जूरी सदस्यों का आयु वर्ग 25 से 55 वर्ष के बीच होगा तथा इस जूरी मंडल में 15 से 1500 तक जूरी सदस्य हो सकेंगे। इस क़ानून के लागू होने के बाद से इन मुकदमो का फैसला आम नागरिको के जूरी मंडल द्वारा किया जाएगा न कि जजों द्वारा | 

ऐसे लगभग 17 देश हैं जहां जूरी प्रणाली(सिस्टम) का प्रयोग किया जाता है – कनाडा, अमेरिका, इंग्‍लैण्‍ड, फ्रांस, डेनमार्क, नार्वे, स्‍वीडन, फिनलैण्‍ड, जर्मनी, स्‍पेन, पुर्तगाल, इटली, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैण्‍ड।

रूस के लगभग 25 प्रतिशत जिलों में अब जूरी प्रणाली(सिस्टम) का प्रयोग किया जाने लगा है और जापान वर्ष 2009 से जूरी प्रणाली(सिस्टम) प्रारंभ कर चुका है।

लगभग 90 देशों में जज प्रणाली(सिस्टम) का प्रयोग किया जाता है। जज प्रणाली(सिस्टम) का प्रयोग करने वाले हर एक देश के न्‍यायालय भ्रष्‍ट हैं, पुलिसवाले भ्रष्‍ट हैं और राजव्‍यवस्‍था भी भ्रष्‍ट है

रूस ,चीन और जापान को भी अपने यहां की अदालतों में भ्रष्‍टाचार और भाई-भतीजावाद की समस्‍या के कारण जूरी प्रणाली(सिस्टम) लागू करना पड़ा था।

जूरी प्रणाली(सिस्टम) पर ऐतिहासिक दृष्‍टिकोण से एक नजर: 

रोम में मजिस्‍ट्रेटों का चयन हुआ था और वहां अत्‍यधिक अपराध के कारण जूरी प्रणाली(सिस्टम) का प्रयोग शुरू हुआ जिससे पड़ोस के देशों की तुलना में वहां बहुत ही कम भाई–भतीजावाद और कम भष्‍टाचार वाला शासन कायम हुआ।

यही कारण था कि रोम अन्‍य देशों की तुलना में ज्‍यादा मजबुत/सुदृढ़ हो गया लेकिन रोम का पतन हो गया जिसका सबसे प्रमुख कारण यह था कि जनसंख्‍या के एक बहुत बड़े हिस्‍से (गुलामों) को वोट/मत देने का अधिकार नहीं था। इसके बाद हरेक शासन में राजा या राजा द्वारा नियुक्‍त किए गए लॉर्ड के द्वारा सजा सुनाई जाती थी।

वर्ष 1200 में, इंग्‍लैण्‍ड पहला राष्‍ट्र बना जिसने इस व्‍यवस्‍था को उलट दिया – और मैग्‍ना कार्टा में यह घोषणा की कि राजा के ऐजेन्‍ट अब आरोप ही लगाएंगे और नागरिक (जूरी/निर्णायक मण्‍डल के सदस्‍य) ही दोषी होने का निर्णय/फैसला करेंगे और सजा सुनाएंगे। यह एक ऐतिहासिक बदलाव था, एक ऐसा बदलाव जिससे शासकों/राजाओं और प्रजा के बीच के संबंधों में पूरी तरह से बदलाव आ गया।

अब राजा/शासक के पास बन्‍दी बनाने अथवा यहां तक कि अर्थदण्‍ड/जुर्माना लगाने का भी अधिकार नहीं रह गया। इसी जूरी प्रणाली(सिस्टम) का ही यह परिणाम हुआ कि अब कारीगर/शिल्‍पकार और व्‍यापारी अपने आप को लॉर्डां के मनमाने शासन से अपना बचाव कर पाए और प्रगति होनी शुरू हो गई। केवल इसी कारण/बदलाव से इंग्‍लैण्‍ड में कारीगर/शिल्‍पकार सम्‍पन्न हो गए और उनमें से कुछ बाद में चलकर उद्योगपति बन बैठे।

इंग्‍लैण्‍ड में औद्योगिक क्रान्‍ति इसी जूरी प्रणाली(सिस्टम) के कारण ही आई – जूरी/निर्णायक मण्‍डल के सदस्‍य ने कारीगर/शिल्‍पकार, व्‍यापारियों और उद्योगपतियों को लॉर्डों और राजाओं के मनमाने जुर्माने से बचाया और इस प्रकार जूरी/निर्णायक मण्‍डल के सदस्‍य ने इन्‍हें धनवान बनने के लिए योग्य बनाया ।

तथाकथित पुनर्जागरण की कहीं कोई भूमिका नहीं थी। इंग्‍लैण्‍ड ने जो प्रगति/तरक्‍की की, यदि उसके लिए पुनर्जागरण जिम्‍मेवार था तो बताएं कि ऐसी प्रगति इटली ने क्‍यों नहीं की जहां कि पुनर्जागरण सबसे पहले आया? बुद्धिजीवियों ने यह बताने के दौरान कि यूरोप ने सारी दुनियां पर कैसे कब्‍जा कर लिया, जानबुझकर जूरी प्रणाली(सिस्टम) की भूमिका को दबा दिया है क्‍योंकि वे नहीं चाहते थे कि छात्र समुदाय जूरी प्रणाली(सिस्टम) के बारे में जानें ताकि ऐसा न हो कि वे इस प्रणाली(सिस्टम) की मांग ही न करने लगें।

इस प्रक्रिया को ऐसे समझा जा सकता है:- 

चिकीं :- मास्टर जी एक कन्फ्यूजन हैं जूरी सिस्टम में..
मास्टर जी :- क्या ?
चिंकी :- ज्यूरी सिस्टम में केस का फैसला करने को वोटर लिस्ट से रेंडमली पांच लोगो को बुलाया जायेगा….तो इन लोगो को क्वालिफिकेशन के हिसाब से बुलाया जायेगा या ऐसे ही ?
मास्टर जी :- तो तेरा सवाल यह है कि, अनपढ़ लोग क्या फैसला ले पाएंगे ?
चिकीं :- हाँ……
मास्टर जी :- हमने ज्यूरी की जो प्रक्रिया प्रस्तावित की है उसमे ज्यूरी के लिए 24 नागरिको को बुलाया जाएगा।
इनमे से दोनों पक्षो के वकील 4-4 यानी कुल 8 नागरिको को उनकी मेधा, समझ, क्षेत्र या पहचान के आधार पर बाहर कर सकेंगे। शेष बचे 16 नागरिको में से 12 सदस्यो को मुख्य ज्यूरी मंडल और शेष 4 को वैकल्पिक ज्यूरी में रखा जाएगा।

चिकीं :- ज्यूरी सदस्यो के चयन में शिक्षा की कोई भूमिका नहीं होगी ?

मास्टर जी :- क़ानून की समझ व न्याय सामान्य समझ का विषय है, तथा इसका शिक्षा से कोई सरोकार नहीं है। यह जिम्मेदारी वादी-प्रतिवादी के वकीलो पर होगी कि वे मामले को सरल भाषा में इस तरह से प्रस्तुत करे कि ज्यूरी सदस्य मामले को समझ सके। तकनिकी मामलो की सलाह के लिए ज्यूरी सदस्य विषय के विशेषज्ञों ( जैसे आर्थिक मामलो के विषय में C.A व चिकित्सीय मामलो में डॉक्टर्स ) से परामर्श ले सकेंगे।

कानूनी मामलो से सम्बन्धी निर्देश के लिए सुनवाई में जज मौजूद होगा जो कि मामले से सम्बंधित कानूनी पहलुओ के बारे में ज्यूरी को सलाह देगा।
चिकीं :- लेकिन भारत के नागरिकों में कानूनी समझ नहीं हैं |
मास्टर जी :- ज्यूरी सिस्टम के आने से भारत के नागरिको में क्रमिक रूप से कानूनों की समझ आने लगेगी तथा वे फैसले देने में ज्यादा विवेकशील होते चले जायेगे। इस समझ को बढ़ाने के लिए हमने आठवी क्लास से क़ानून विषय को अनिवार्य रूप से पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव किया है।
चिकीं :- इसका कोई लिखित ड्राफ्ट हैं या मोदी की तरह हवा में बातें…….. |
मास्टर जी :- ड्राफ्ट का लिंक दे रहा हूँ जरूर पढ़ना | अच्छा लगे तो अपने मिलने वाले को बताना |
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ज्यूरी प्रक्रिया के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/548841788627353

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 जय हिन्द, जय भारत, वन्देमातरम ||

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