बिना जनसेवक और अफसरों के काम देखे, नागरिक कैसे विकल्प चुन सकते हैं ?

बिना "जन्सेवेक काम डिटेल सरकारी वेबसाईट पर" के दो धाराओं के कोई कानून जैसे रिकॉल और जूरी सिस्टम हानिकारक है . बिना जनसेवक और अफसरों के काम देखे, नागरिक कैसे विकल्प चुन सकते हैं ? . जब भी कोई नया व्यक्ति पद पर आता है, तो वो बड़े बड़े भाषण देता है और लोगों से … पढ़ना जारी रखें बिना जनसेवक और अफसरों के काम देखे, नागरिक कैसे विकल्प चुन सकते हैं ?

Advertisements

आजादी की लड़ाई में हम किस बिंदु पर निर्णायक मार खा गए? जनसामान्य क्या समाधान करे? 

आजादी की लड़ाई में हम किस बिंदु पर निर्णायक मार खा गए और कैसे पिछले 71 सालो से हम यह मार लगातार खाते जा रहे है ? और समाधान ?  .   राजनैतिक विमर्श में "आजादी" लफ्ज के कोई मायने नहीं होते। यह सिर्फ एक नारा / लेबल है। इसीलिए "आजादी" शब्द को केंद्र में रखकर … पढ़ना जारी रखें आजादी की लड़ाई में हम किस बिंदु पर निर्णायक मार खा गए? जनसामान्य क्या समाधान करे? 

क्या मौजूदा सरकारकी नीतियां सरकारी बैंको को खतम कर धनपिशाचोकी मल्कियत वाली प्राइवेट बैंकोको खुश करने वालींहैं?

   रिज़र्व बैंक ने अपनी वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट में कहा है कि बैंकिंग क्षेत्र पर गैर-निष्पादित क़र्ज़ का दबाव बना रहेगा. आने वाले समय में यह और बढ़ेगा.  मार्च 2019 तक 11.6 प्रतिशत से बढ़कर 12.2 प्रतिशत होगा.रिजर्व बैंक ने अपनी वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा है कि बैंकिंग क्षेत्र पर सकल गैर-निष्पादित कर्ज का दबाव लगातार … पढ़ना जारी रखें क्या मौजूदा सरकारकी नीतियां सरकारी बैंको को खतम कर धनपिशाचोकी मल्कियत वाली प्राइवेट बैंकोको खुश करने वालींहैं?

पारदर्शितापूर्ण लोकतांत्रिक प्रशासनिक व्यवस्था के लिए टी सी पी मीडिया पोर्टल ड्राफ्ट से सम्बंधित संदेह व उनका निवारण

 मित्रों, हमारे देश में पारदर्शिता पूर्ण जनशिकायत प्रणाली का अभाव रहने के कारण यहाँ कई समस्याओं को कई दशकों से रोज रोज झेलना एक उत्सव बन चुका है.  जैसे कि सड़कों पर व्याप्त गड्ढे के निवारण के लिए निविदा उस समय स्वीकारी जाती है जिससे सड़क मरम्मती के कार्य बिलकुल बारिश के ही शुरुआत के समय … पढ़ना जारी रखें पारदर्शितापूर्ण लोकतांत्रिक प्रशासनिक व्यवस्था के लिए टी सी पी मीडिया पोर्टल ड्राफ्ट से सम्बंधित संदेह व उनका निवारण

क्या भारत सरकार ही भारतीय सेना की छावनियाँ ख़त्म कर देंगी ?

भयानक ! जो 70 सालो में नही हुआ वो 4 साल में कर दिखाया !  भारतीय सेना ने 'पैसे बचाने के लिए रक्षा मंत्रालय को अपनी सभी छावनियाँ ख़त्म करने का प्रस्ताव दिया!  इसका मतलब हुआ देश भर के सबसे महत्वपूर्ण 'प्राइम' ठिकानों में मौजूद 2 लाख एकड़ से ज़्यादा ज़मीन स्थानीय प्रशासन को वापस करना! … पढ़ना जारी रखें क्या भारत सरकार ही भारतीय सेना की छावनियाँ ख़त्म कर देंगी ?

देश में आधी आबादी के खिलाफ बढती दुर्घटनाएं और उनका समाधान

 देश में आधी आबादी के खिलाफ विकराल रूप से बढती भयानक घटनाये यही साबित करतीं हैं की सामाजिक सोच अभी भी पाषाण युगी ही है जिसे आधी आबादी के बौद्धिकता से भयंकर इर्ष्या व कुंठा है, जिसे वे अन्य दिशा देने में भयग्रस्त हैं जिसके कारण वे आधी आबादी का शोषण कर उन्हें नष्ट कर … पढ़ना जारी रखें देश में आधी आबादी के खिलाफ बढती दुर्घटनाएं और उनका समाधान

तन्वी सेठ प्रकरण में अपने कर्तव्य का पालन करने के कारण पासपोर्ट सेवा अधिकारी का जबरन तबादला व समाधान

मेरी यह पोस्ट सीधे-सीधे स्त्रियों को ही सम्बोधित है. तन्वी सेठ प्रकरण के पीछे चाहे जो राजनीति, कूटनीति या विश्वनीति रही हो, भारतीय परिप्रेक्ष्य में उसका एक ज़रूरी सामाजिक संदर्भ भी है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है। यह है “इंटरफ़ेथ मैरिजेस” का मसला। भारत में हिंदुओं के शादी-ब्याह सम्बंधी मामलों के लिए “हिंदू मैरिज … Continue reading तन्वी सेठ प्रकरण में अपने कर्तव्य का पालन करने के कारण पासपोर्ट सेवा अधिकारी का जबरन तबादला व समाधान