पद्मावती बैन, जज-हत्या, न्यायिक भ्रष्टाचार और लोकतान्त्रिक समाधान

मित्रों, सन-1947 से लेकर 2014 तक जनता न्यायालयों में जजों से न्याय मांगते थे, लेकिन जून-2014 के बाद हालात कुछ ऐसे हो गए कि जज ही सार्वजनिक प्रेस-वार्ता द्वारा जनता से न्याय की गुहार लगा रहे हैं. क्या इसके पहले लोकतंत्र कभी खतरे में नहीं आया था? जबकि सर्वोच्च न्यायलय द्वारा लिए गए सभी निर्णयों … पढ़ना जारी रखें पद्मावती बैन, जज-हत्या, न्यायिक भ्रष्टाचार और लोकतान्त्रिक समाधान

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समाधान में नागरिकों की सहभागिता

चिंकी :- मास्टर जी राईट टू रिकॉल पार्टी के कुछ कार्यकर्ता अच्छा एजेंडा लेकर जनता में कानून प्रचार का काम कर रहे हैं | कोई संगठन बनाकर काम क्यों नहीं करते. ? . मास्टर जी :- "संगठित करना" सबसे अधिक विभाजनकारी नीति है । और हिन्दूओ को 1925 से ही इसका शिकार किया जा रहा … पढ़ना जारी रखें समाधान में नागरिकों की सहभागिता

टी सी पी हेरफेर युक्त मीडिया प्रभाव को कम कर बेहतर लोकतंत्र बनाने में कामयाब होगी

🚩 लोकतंत्र में प्रदर्शन, सत्याग्रह और अनशन की जगह नही : कोर्ट भाई अभी तक तो हमने यही देखा है और सुना है कि लोकतंत्र में जनता को अगर अपनी आवाज सरकार तक पहुँचानी हे को वो एक चिल्लर, घटिया तरीका है धरना दो, प्रदर्शन करो, अनसन करो, नारेबाजी करो, सत्याग्रह करो आदि इन सब का … पढ़ना जारी रखें टी सी पी हेरफेर युक्त मीडिया प्रभाव को कम कर बेहतर लोकतंत्र बनाने में कामयाब होगी

बेहतर प्रजातंत्र के लिए प्रशासन पारदर्शी होना चाहिए.

क्यों प्रख्यात / नाम वाले बुद्धिजीवी (EII) इस प्रजा अधीन राजा (राईट टू रिकाल) मांग का विरोध करते हैं? 🚩प्रजा अधीन राजा (राईट टू रिकाल ; भ्रष्ट को नागरिकों द्वारा बदलने का अधिकार) मांग को पूरी करने के लिए सैकड़ों करोड़ों रुपए की आवश्यकता नहीं है, न ही हजारों कर्मचारियों या इमारतों की आवश्यकता है … पढ़ना जारी रखें बेहतर प्रजातंत्र के लिए प्रशासन पारदर्शी होना चाहिए.